श्री अचल सिंह भाटी


आपका जन्म 1 जनवरी, 1937 को पिताश्री लालजी (जन्म सम्वत् 1957 भादवा सुद 1 स्वर्गवास 05.03.1994)मगारामजी भाटी एवं माता श्रीमती जमना (जन्म सम्वत् 1909, स्वर्गवास 23.03.1980) के यहॉ ग्राम चैनपुरा हाल मगरा पूंजला जोधपुर में हुआ। (आपके दादाजी मघारामजी बेटा गीगजी, गीगजी बेटा रेखोजी, जो भाटीयॉ बेरा चैनपुरा, जोधपुर में खेती करते थे।) आपने बी.एस.सी., एल.एल.बी., डी.सी.एल.एल. तक की शिक्षा जोधपुर में प्राप्त की। विद्यार्थी जीवन से ही आप की रूचि खेलकूद, वाद-विवाद प्रतियोगिता, स्काउटिंग और आर्य समाज में रही तथा आपने पिछडे़ व शोषित समाज को जागृत व संगठित करने में ही अपना अधिकांश समय लगाया। छात्र जीवन से ही आपने शोषित समाज की बैंठकों , सम्मेलनों में भाग लेना शुरू किया तथा उनको प्रजातांत्रिक व स्वतन्त्रता के विचार दिये। आपका विवाह श्री जनकसिंह जी परिहार की सुपुत्री मायारानी के साथ सोमवार, 6 मई, 1963 को हुआ।

आप 3 साल तक राजकीय हाई स्कूल में विज्ञान के अध्यापक रहें, लेकिन बाद में सन् 1964 से 1997 तक भारत की प्रसिद्ध दवाई कम्पनी सिपला में फील्ड ऑफिसर के रूप में राजस्थान प्रदेश में कार्य किया।

आप अखिल भारतीय माली सैनी व कुशवाहा महासभा के उपाध्यक्ष पद पर भी रहे तथा अब उसकी कार्यकारीणी के सदस्य है। आप राजस्थान प्रदेश माली सैनी महासभा के संस्थापक सदस्य है। जिसमें आपने संगठन मंत्री , मंत्री पद पर ही कई वर्षो तक कार्य किया व 02.01.1993 से आज तक इस संस्थान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर कार्य कर रहें है। आप जोधपुर में समाज की विभिन्न संस्थाओं के विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके है। आप माली सैनी शिक्षा प्रचार संघ के 7 वर्ष तक अध्यक्ष पद पर रहे । आप अखिल भारतीय माली सैनी कुशवाहा समाज की गतिविधियों की पूर्ण जानकारी रखते है। भारत वर्ष के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न स्थानों पर आयोजित समाज की सभी सभाओं में भाग लिया तथा समाज के मार्ग दर्शक बनें। राजस्थान, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र के जिलास्तरों की लगभग सभी सभाओं में भाग लेकर अपने समाज में चेतना, शैक्षिक संगठन व सामाजिक कुरीतियों को दूर करने तथा सामूहिक विवाह कराने में पूर्ण योगदान दिया।

माली सैनी कुशवाहा समाज जो राजस्थान के सभी जिलों में बसा हुआ है, उसे आप जिला, सभाग व प्रान्तीय स्तर पर सम्मेलन करवा कर संगठित कर रहे है। समय-समय पर आपने लेख, पत्र, बुलेटिन व राजसीन माली- सैनी समाज पर एक पुस्तक का प्रकाशन कर समाज में शिक्षा, संगठन व राजनैतिक जागृति लाने का प्रयास किया है। आपने विभिन्न जिलों में समाज को प्रेरित कर समाज भवन, छात्रावासों का भी निर्माण करवाया है। आपने सम्पूर्ण राजसीन के गॉवों, पंचायतों, शहरों में समाज के कितने घर है तथा कितने मतदाता है व कौन समाज के प्रमुख व्यक्ति है इसकी पूर्ण जानकारी ली तथा समाज का जहॉ उचित बाहुल्य है वहां समाज के लोगों को संदेश भेजकर व संगठित कर समाज के ज्यादा से ज्यादा सरपंचों व पार्षदों को जिताने व उच्च पद प्राप्त करने की प्रेरणा दी है। आपका दृढ़ विश्वास है कि भारत के सभी प्रान्तों में स्वजातीय शाखाएं जो माली सैनी, काछी, कुशवाहा, शाक्य, मार्य, रामी, रेड्डी आदि नामों से जानी जाती है, एक ही माली जाति रूपी बाग के फूल व मोती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर इस समाज की शाखाओं को संगठित कर उन्हे एकसूत्र में पिरोते हुए एक मंच पर लाना होगा, तथा हमें सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक व राजनैतिक क्षेत्र में लाभ व सता और शासन में उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।

आपने राजस्थान के पिछ़डे़ वर्ग के महासंघ के महामंत्री के पद पर सन् 1975 से कार्य करते हुए मंडल आयोग को अपनी रिपोर्ट भजी थी। 140 जातियों को संगठित करके आपने उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया है। आप समय-समय पर राजस्थान सरकार, अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग, भारत सरकार व राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से संवैधानिक अधिकार दिलवाने के लिये निरंतर संघर्षरत है । आपने मण्डल कमशिन के साथ सम्पूर्ण राजस्थान प्रदेश में भ्रमण किया व भारत के कई प्रान्तों का दौरा करके माली सैनी-कुषवाह समाज को पिछड़े वर्ग में सम्मिलित करवाया । मण्डल आयोग की सिफारिषों को लागू करवाने के लिये आपने कई बार रैलियां निकाली, धरने व ज्ञापन दिये तथा दो बार दिल्ली व जोधपुर में गिरफ्दारियां भी दी। अंततः अन्य पिछड़ वर्ग कारे आरक्षण मिल गया । आज भी उन्हें संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिये प्रयास कर रहें है। आपकी राजनीति में कोई रूचि नहीं है न ही आप किसी पार्टी से सदस्य है परन्तु आप सदियों से शोषित पिछडी़ जातियों के साथ सामाजिक न्याय चाहते है। उनके सभी तरह के अधिकारों के लिये उन्हे प्रेरित करते रहते है।