माननीय श्री अशोक गहलोत पूर्व मुख्यमंत्री राजस्थान राज्य


’होनहार बिरवान के होन चीकने पात’ सूक्ति के अनुसार महापुरूषो के लक्षण प्रारम्भ से ही प्रकट होने लगते है माली सैनी समाज के लोकप्रिय नेता श्री अशोक गहलोत ऐसे अग्रणी नेताओ में गिने जाते है, जो प्रारम्भ से ही प्रतिभा के धनी रहे है। आपका जन्म 3 मई 1951 को प्रसिद्ध जादूगर श्री लक्ष्मण सिंह गहलोत के घर महामन्दिर, जोधपुर में हुआ। प्राथमिक से लेकर विश्व विद्यालय स्तर की शिक्षा आपने जोधपुर शहर में ही ग्रहण की। विद्यार्थी जीवन से ही नेतृत्व की अद्-भूत क्षमता आपमें सर्वदा विद्यमान रही। अपने इसी सफल नेतृत्व गुण के कारण आप राजनीति की प्रत्येक सीढी पर सफलता पूर्वक चढते गये और केन्द्रीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री(राजस्थान) के रूप में लोकप्रियता की चरम परिणति को प्राप्त हुए। जोधपुर विश्वविद्यालय, जोधपुर के नियमित विज्ञान स्नातक(बी.एस.सी.) की उपाधि से विभूषित हुए। विश्वविद्यालय के नियमित विद्यार्थी के रूप मे आपने छात्रसंघ के विभिन्न पदों पर सफलतापूर्वक कार्य करते हुए युवा वर्ग का सफल नेतृत्व किया। इस गुण ने आपको राजनीति मे प्रवेश करवाया और फिर आपने कभी पीछे मुडकर नही देखा।

विश्वविद्यालय के विद्यार्थी संगठन (एन.एस.यू.आई.) के अध्यक्ष के रूप मे 1974 से 1979 तक सफलता पूर्वक कार्य किया तथा आपको 1979 में जोधपुर शहर जिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। तब आपने सक्रिय राजनीति में पहली बार कदम रखा और प्रथम प्रयास में ही विजयश्री प्राप्त की। इस प्रकार सातवीं लोकसभा (1980) के चुनाव में कांग्रेस दल की ओर से जोधपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीत कर सातवीं लोकसभा में जोधपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कियां। सांसद के रूप में अपने प्रथम कार्यक्रम (1980 से 1984) में जोधपुर क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के सपने ही नही संजोये अपितु उन्हे साकार भी किया। आम जनता में आपकी उज्ज्वलतम छवि, साम्प्रदायिक सद्-भाव के लिए आप द्वारा उठाये गये सराहनीय कदम, क्षेत्र के विकास की ललक तथा नेतृत्व की अद्-भूत क्षमता के कारण आप नौवी लोकसभा को छोड़कर बाहरवी लोकसभा तक निरन्तर जोधपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद के रूप में चुने जाते रहे। आपकी लोकप्रियता तथा बेदाग छवि का परिणाम था कि आपको केन्द्रीय मन्त्री-मण्डल में भी स्थान मिला। मंत्रीमण्डल (केन्द्रीय) में 2 सितम्बर 1982 से 4 फरवरी 1983 तक पर्यटन विभाग के उपमंत्री, 14 फरवरी 1983 से 7 फरवरी 1984 तक पर्यटन एवं नागरिक उडडयन विभाग के उपमंत्री, 7 फरवरी 1984 से 31 अक्टूबर 1984 तक पुनः 12 नवम्बर 1984 से 31 दिसम्बर 1984 तक खेल उपमंत्री, 31 दिसम्बर 1984 से 26 सितम्बर 1985 तक पर्यटन एवं नागरिक उडडयन राज्य मंत्री तथा 21 जून 1991 से 18 जून 1993 तक कपड़ा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पद को सुशोभित करते हुए आपने एक ओर जहॉ सम्बन्धित विभागो को नये आयाम प्रदान करते हुए सफलता पूर्वक कार्य किया वही दूसरी ओर जोधपुर संसदीय क्षेत्र का सफल प्रतिनिधित्व करते हुए स्वयं की एवम् क्षेत्र कि विशिष्ट पहचान बनाई।

राज्य एवं केन्द्र सरकार मे मंत्री पद पर सफलतापूर्वक कार्य करने के पश्चात आपकी राजनीति लोकप्रियता में उतरोत्तर वृद्धि होती गई जिसकी चरम परिणति तब हुई जब दिसम्बर 1998 में सम्पन्न 11 वी विधानसभा के चुनाव परिणाम सामने आये। श्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस दल को भारी बहुमत मिला। आपको बहुमत प्राप्त विधायक दल का नेता चुन लिया गया और जब 1 दिसम्बर 1998 को आपने राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो समूचे मारवाड़ क्षेत्र और विशेष रूप से माली सैनी समाज की खुशी का ठिकाना नही रहा। जोधपुर के तीसरे तथा माली सैनी समाज के प्रथम मुख्यमंत्री बनने पर सर्वत्र घी के दीये जलाये गये, मिठाइयॉ बांटी गई। सर्वत्र अपार उत्साह व हर्ष का वातावरण था। मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के पश्चात आपके प्रथम बार जोधपुर आगमन पर तो जैसे सूर्यनगरी ने मानों अपने प्रत्येक पथ पर पलक पॉवड़े बिछादियें। अपने प्रिय मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए सम्पूर्ण नगरी दुल्हन की तरह सज धज कर तैयार थी। भव्य शोभायात्रा सम्पूर्ण शहर के मुख्य मार्गो से होकर निकाली गई। सर्वत्र पुष्पवृष्टि, माल्यार्पण, अबीर.गुलाल से स्वागत-अभिंनदन। लोगों में अपार उत्साह उमंग, हर्ष का सागर सा उमड़ गया। प्रत्येक व्यक्ति ने अपनी प्रसन्नता को अपने-अपने तरीके से व्यक्त किया। मुख्यमंत्री बनने के साथ ही श्री गहलोत के जीवन का चुनौती एवं उत्तरदायित्वपूर्ण अध्याय का शुभारम्भ हुआ। आपने प्रत्येक चुनौती को अत्यंत ही धैर्य एवं गम्भीरता से लिया।

आपके अद्-भूत व्यक्तिव, विशिष्ट गुण, योग्यताओ तथा क्षमताओं का पूरा लाभ राजस्थान की जनता को मिले इस दृष्टि से राजस्थान के माननीय अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार ने राज्य के चहुमुखी विकास के लिए सर्वशिक्षा, चिकित्सा सुविधा, सूचना का अधिकार, सड़क व अन्य अनेक सार्वजनिक निर्माण कार्य, असहाय वृद्धावस्था पेंशन, वन-सम्पदा संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, भष्टाचार उन्मूलन,विद्युत उत्पादन में आत्म निर्भरता, नागरिक अधिकारी की सुरक्षा, महिला उत्पीड़न व अत्याचार से मुक्त, बालिका शिक्षा, पशुधन संरक्षण, कृषि सुविधाओें के विस्तार जैसे क्षे़त्रो मे सतत् एवं अथक प्रयत्न किये। आपकी सूझबूझ एवं सदप्रयत्नों से साम्प्रदायिक सद्-भावना में उठाये गये कदम तो अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बन गये। आबू पर्वत पर सम्पन्न कांग्रेस मुख्यमंत्रियों की संगोष्ठी में गहलोत सरकार के कामकाज को सभी मुख्यमंत्रियों ने सराहा। राज्य की प्रगति ने सभी मुख्यमंत्रियों को दांतो तले अंगुली दबाने के लिए विवश कर दिया। आपने अपने राजनैतिक जीवन की बुलंदियों और सफलता के शिखर को उस समय छू लिया जब "इंडिया टुडे" द्वारा किये गये सर्वे में आपको सम्पूर्ण देश का नम्बर 1 मुख्यमंत्री घोषित किया गया।

जनवरी 2004 से 16 जुलाई 2004 तक श्री गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में विशेष आमन्त्रित सदस्य के रूप में कार्य किया और पद पर रहते हुए हिमाचल प्रदेश व छत्तीसगढ प्रदेश प्रभारी के रूप में सफलता पूर्वक जिम्मेदारी का निर्वहन किया। 17 जुलाई, 2004 से 18 फरवरी, 2009 तक श्री गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप मे कार्य किया इस दौरान श्री गहलोत ने उत्तरप्रदेश, दिल्ली, समस्त प्रमुख इकाईयों व सेवादल के प्रभारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

आपने 13 दिसम्बर 2008 को दूसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। एक फिर समूचे मारवाड़ क्षेत्र और विशेष रूप से माली सैनी समाज की खुशी का ठिकाना नही रहा। घी के दीये जलाये गये, मिठाइयॉ बांटी गई।

माह दिसम्बर 2008 से राज्य सरकार के फ्लेगशिप कार्यक्रमों सहित सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अनेक नये लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों यथा महंगाई के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सुरक्षा योजना, गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना, मुख्यमंत्री शहरी बी.पी.एल. आवास योजना, अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना में सभी के लिए निःशुल्क दवाइयां, पशु निःशुल्क दवा योजना, मुख्यमंत्री बीपीएल जीवन रक्षा कोष योजना, राजस्थान मां जननी शिशु सुरक्षा योजना केा लागू किया गया है। इसी प्रकार किसानों के रोजगार के साधन, अनुसूचित जाति/जनजाति, अल्पसंख्यक, गरीब एवं कमजोर के उत्थान के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच के दायरे को बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश में ढांचागत मजबूती के नये आयाम स्थापित हुये है। राज्य में पहली बार राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान करने की गारण्टी अधिनियम-2011 को लागू किया गया है। इस अधिनियम के अन्तर्गत आज जनता से जुडे. 18 विभागों की 153 सेवाओं को समयबद्ध एवं पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया गया है। सुगम एकल खिड़की के माध्यम से 41 सेवाओ के लिए सम्पूर्ण राजस्थान में अगस्त 2012 तक 37,34,804 लोगों को लाभान्वित किया गया। सुगम आर पी जी शिकायत निवारण पोर्टल मई 2011 में प्रारंभ किया गया।

साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतीक, मानवता की मूर्ति, सफलतम राजनेता, अप्रतिम व्यक्तित्व के धनी, धैर्य के पारावार, उज्ज्वलता के प्रतीक, शांति व समृद्धि के अग्रदूत धुन के पक्के, मारवाड़-रत्न, माली सैनी समाज के सपूत श्री अशोक गहलोत का व्यक्तिगत एवं राजनैतिक भविष्य सर्वतोप्रकारेन सुखद, सम्पन्न आशानुकूल तथा उज्ज्वलतम् हो ऐसी हार्दिक शुभकामनाएँ तथा ईश्वर से भी पुनः पुनः प्रार्थना।