श्री सुनिल परिहार, पूर्व अध्यक्ष माली संस्थान, जोधपुर


शिक्षा प्रेमी, उच्च शिक्षित, लगनशील, परिश्रमी, उद्यमी, समाजसेवी श्री सुनिल परिहार का जन्म 7 जुलाई 1959 को जोधपुर के प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं समाज सेवी परिवार में पिता श्री जगदीश सिंह परिहार दादा श्री सेठ भीकमदास परिहार माता श्रीमती शान्ति देवी के यहां हुआ। आपके दादा जी सेठ श्री भीकमदास परिहार ने रातानाडा, जोधपुर में ग्रामीण छात्रों की उच्च शिक्षा हेतु छात्रावास का निर्माण करवाया। इसका नाम सेठ भीकमदास परिहार शिक्षा सेवा सदन ट्रस्ट है। जिसके अध्यक्ष प्रसिद्ध समाज सेवी राजनेता आपके पिताश्री जगदीश सिंह परिहार है। आपकी शादी श्रीमति ममता पुत्री श्री बींजराज गहलोत (प्रमुख घड़ी व्यवसायी व समाज सेवी) के साथ सम्पन्न हुई। आपके एक पुत्री यामिनी एवं पुत्र द्विवेष है।

आपने छात्र जीवन से ही विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से छात्र संघ के चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाई है। आपने जोधपुर पॉलिटेक्निक कॉलेज से 1977 में प्रथम श्रेणी से सिविल इंजीनियरींग में डिप्लोमा पास किया। तद्पश्चात आपने राजकीय सेवा में सार्वजनिक निर्माण विभाग में कनिष्ठ अभियन्ता की नौकरी प्रारम्भ की । परन्तु आपके पिताश्री की प्रेरणा से आपने नौकरी से त्याग-पत्र दे दिया। आपके स्वयं का उद्योग (बासनी,जोधपुर मैं) मैसर्स ’जगशान्ति मिनरल ग्रांइडिग मिल्स’के नाम से खनिज परिष्करण हेतु स्थापित किया। दो वर्ष बाद आबूरोड में कॉलेज एण्ड रिफेक्ट्रीय इण्डस्ट्री लगाई। आप भारत भर में भ्रमण कर प्रतिष्ठित उपक्रमों में सीधे माल विपणन व अपने उत्पादों का निर्यात अफ्रीका, व पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल आदि में कर रहे हैं। अपने कठिन परिश्रम के बल पर उत्पादकता एवं गुणवता की दृष्टि से उद्योग की प्रतिष्ठा भारत भर में बनाई व स्वयं की खान भी बाड़मेर स्थित शिव तहसील आंकली-थूम्बली में हैं।

आप मरूधरा इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य व वर्ष 2000 से 2002 तक अध्यक्ष रहें। जोधपुर इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के दो वर्ष सचिव पद पर रहे। 1984 में राज्य स्तरीय उद्यमियों का सम्मेलन जोधपुर में करवाने में आपका सक्रिय योगदान रहा। 1986 मेँ मरूधरा इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के संयुक्त सचिव रहें। 1991 में जोधपुर इण्डस्ट्रीज एसोसिऐशन के सचिव बनें। 1992 से पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्त शिल्प एसोसिएशन के संयुक्त सचिव व 1994-95 में अतिरिक्त सचिव और 2000 में सलाहकार व 2001-2002 में उपाध्यक्ष रहें।

विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में आपकी सक्रिय भागीदारी रही। जिसमें जोधपुर (मारवाड़) की माली समाज की सर्वोच्च संस्था माली संस्थान के अध्यक्ष पद पर 2002 से 2005 तक कठिन परिश्रम एवं सफलता पूर्वक कार्य किया। आप पुनः 06.11.2005 को निर्विरोध इस संस्था के अध्यक्ष चुने गये। इस संस्था द्वारा अभी तक आपके प्रयासों से एक हजार से अधिक छात्रों को छात्रवृति दी गई तथा समाज की असहाय विधवा एवं वृद्धों को मासिक पेंशन प्रदान की गई। सैकड़ो गरीब एवं कमजोर लोगो को असाध्य बीमारी के निदान हेतु आर्थिक अनुदान राशि प्रदान की गई। युवकों मे जागृति पैदा कर उनको रक्त दान करवाने एवं सैकड़ो विद्यार्थियों को प्रतियोगिता परीक्षाओं में निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान करने जैसी सुविधाएं प्रदान करवाई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए दो स्थानों पर छात्रावास की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इसके अलावा ’मेरीज ब्यूरो’ का भी संचालन किया जा रहा है।